Tuesday, February 8, 2011

गब्बर सिंह का चरित्र चित्रण

1. सादा जीवन , उच्च विचार : उसके जीने का ढंग बड़ा सरल था . पुराने और मैले कपड़े , बढ़ी हुई दाढ़ी , महीनों से जंग खाते दांत और पहाड़ों पर खानाबदोश जीवन . जैसे मध्यकालीन भारत का फकीर हो . जीवन में अपने लक्ष्य की ओर इतना समर्पित कि ऐशो - आराम और विलासिता के लिए एक पल की भी फुर्सत नहीं . और विचारों में उत्कृष्टता के क्या कहने ! ' जो डर गया , सो मर गया ' जैसे संवादों से उसने जीवन की क्षणभंगुरता पर प्रकाश डाला था .

२ . दयालु प्रवृत्ति : ठाकुर ने उसे अपने हाथों से पकड़ा था . इसलिए उसने ठाकुर के सिर्फ हाथों को सज़ा दी . अगर वो चाहता तो गर्दन भी काट सकता था . पर उसके ममतापूर्ण और करुणामय ह्रदय ने उसे ऐसा करने से रोक दिया .

3. नृत्य - संगीत का शौकीन : ' महबूबा ओये महबूबा ' गीत के समय उसके कलाकार ह्रदय का परिचय मिलता है . अन्य डाकुओं की तरह उसका ह्रदय शुष्क नहीं था . वह जीवन में नृत्य - संगीत एवंकला के महत्त्व को समझता था . बसन्ती को पकड़ने के बाद उसके मन का नृत्यप्रेमी फिर से जाग उठा था . उसने बसन्ती के अन्दर छुपी नर्तकी को एक पल में पहचान लिया था . गौरतलब यह कि कला के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने का वह कोई अवसर नहीं छोड़ता था .

4. अनुशासनप्रिय नायक : जब कालिया और उसके दोस्त अपने प्रोजेक्ट से नाकाम होकर लौटे तो उसने कतई ढीलाई नहीं बरती . अनुशासन के प्रति अपने अगाध समर्पण को दर्शाते हुए उसने उन्हें तुरंत सज़ा दी .

5. हास्य - रस का प्रेमी : उसमें गज़ब का सेन्स ऑफ ह्यूमर था . कालिया और उसके दो दोस्तों को मारने से पहले उसने उन तीनों को खूब हंसाया था . ताकि वो हंसते - हंसते दुनिया को अलविदा कह सकें . वह आधुनिक यु का ' लाफिंग बुद्धा ' था .

6. नारी के प्रति सम्मान : बसन्ती जैसी सुन्दर नारी का अपहरण करने के बाद उसने उससे एक नृत्य का निवेदन किया . आज - कल का खलनायक होता तो शायद कुछ और करता .

7. भिक्षुक जीवन : उसने हिन्दू धर्म और महात्मा बुद्ध द्वारा दिखाए गए भिक्षुक जीवन के रास्ते को अपनाया था . रामपुर और अन्य गाँवों से उसे जो भी सूखा - कच्चा अनाज मिलता था , वो उसी से अपनी गुजर - बसर करता था . सोना , चांदी , बिरयानी या चिकन मलाई टिक्का की उसने कभी इच्छा ज़ाहिर नहीं की .

8. सामाजिक कार्य : डकैती के पेशे के अलावा वो छोटे बच्चों को सुलाने का भी काम करता था . सैकड़ों माताएं उसका नाम लेती थीं ताकि बच्चे बिना कलह किए सो ऍ

Wednesday, February 2, 2011

दोस्ती

दुनिया का हर रिश्ता हमारे जन्म से संबंधित होता है, जिसे बदल पाना आदमी के लिए मुमकिन नहीं होता है. जन्म के साथ मिले यह रिश्ते मानो या ना मानो हमेशा इंसान से जुड़े ही रहते है. परंतु इनके अलावा एक रिश्ता है जिससे इंसान खुद अपनी पसंद से जुड़ता है.वो रिश्ता है दोस्ती का रिश्ता , दो आदमी दोस्त तभी होते है जब वो एक दुसरे को पसंद करते है.

Thursday, January 27, 2011

गालियां

गालियों के खुले इस्तेमाल का चलन इन दिनों लगातार बढ़ रहा है उससे लगता है कि गाली दिए बिना न तो विद्रोह को सार्थक स्वर दिया जा सकता है, न ही प्रेम को. पुरुषों ही नहीं, बिंदास जीवन जीने वाली युवतियों की बातचीत में भी गालियों का चलन है

गालियां बताती हैं कि आप के भीतर अपने खयालात को तर्क के बूते स्थापित कर पाने की क्षमता नहीं है.

Monday, December 27, 2010

I'm sorry - I was wrong.

Too often we don't realize
What we have until it is gone
Too often we wait too late to say
"I'm sorry - I was wrong."

Sometimes it seems we hurt the ones
We hold dearest to our hearts
And we allow foolish things
To tear our lives apart

Far too many times we let
Unimportant things into our minds
And then it's usually too late
To see what made us blind

So be sure that you let people know
How much they mean to you
Take that time to say the words
Before your time is through

Be sure that you appreciate
Everything you've got
And be thankful for the
Little things in life
That mean a lot

Friday, November 19, 2010

Mobile hai hr larke ki shan…

Mobile hai hr larke ki shan,
Call kar k larkiyon ko krte hain pareshan
MISS BELL or Sms kar k kehte hen meri jan
Tumhari awaz sunne ko tarastey hn mere kaan,
12 girlfrnd bana kar akkarte hain pehlwaan,
Apne frndz ko har raaz bata kr karte hen heran,
Kehte hen larkiyon ko ullu banana buhat he asaan,
Hosh karo girls nadaan, ankhen khol k pehchan,
Mat aao in larkon k chakkar me ye sab hen shetan
Ab ksi larke ki call ay To usko bolna GEE bhai jan