Project Manager is a Person who thinks nine women can deliver a baby in One month.
Developer / Designer is a Person who thinks it will take 18 months to deliver a Baby.
KAM is one who thinks single woman can deliver nine babies in one month.
Client is the one who doesn't know why he wants a baby.
Director is a person who thinks he can deliver a baby even if no man and woman are available.
Resource Optimization Team thinks they don't need a man or woman; they'll produce a child with zero resources.
Documentation Team thinks they don't care whether the child is delivered, they'll just document 9 months.
Quality Auditor is the person who is never happy with a delivered baby.
Tester is a person who always tells that this is not the Right baby.
HR Manager is a person who thinks that... a Donkey can deliver a Human Baby - if given 9 Months !!!
Wednesday, April 14, 2010
Wednesday, April 7, 2010
Interesting Facts about Women.
Interesting Facts about Women.
- Women do NOT want an honest answer to the question, “How Do I look?”
- Women do NOT want an honest answer to the question “Is that girl good looking?”
- Women thinks there are never wrong. Apologizing is the man’s responsibility.
- When a woman answer, “I am fine.”, After a few seconds, she is not fine.
- One average, a woman kisses about 74 men before getting married!
- A girl who stays at home knows much more than a gay who is 20, having out most of the day!!! (the power of GOSSIP.)
- Most of the girls open their mouth while applying mascara.
- All girls are not 100% committed in love.
- Now days girls are not sincere to love compare to guys.
Friday, April 2, 2010
बहाना ढूंढ़ लिया...
कुछ रोज गुजारने की खातिर,एक आशियाना ढूंढ़ लिया
ता-उम्र होश में न आ सकू, ऐसा एक मयखाना ढूंढ़ लिया
क्या मालूम था मुझे, के होगी झूठी वो महफिले अपनी
अब आयी अक्ल, के जीने की खातिर वीराना ढूंढ़ लिया
पूछेगा गर खुदा मुझको,लाये क्या हो उस जहा से तुम
कर दूंगा नजर ये दिल टुटा, ऐसा एक नजराना ढूंढ़ लिया
मिलती नही जो इस दुनिया में,एक पहचान अब मुझको
अक्स जो देखा शीशे में अपना, के कोई बेगाना ढूंढ़ लिया
अपनी सूरत-ऐ-हाल पे हसता है ये सारा जमाना
हम भी समझेंगे के लोगो ने, हसने का बहाना ढूंढ़ लिया
Thursday, December 10, 2009
नौ दिन का उपवास और हमारा मन
नवरात्री के नौ दिन के उपवास का क्या औचित्य है. जब अधिकांश लोग(भक्त) नौ दि्न के उपवास के बाद फिर से भाव शून्य होकर अपने कार्य में लग जाते है. लोगो की धारणा रहती है. कि अगर हर साल की तरह इस साल भी उपवास नही रखा तो शायद कुछ अनिष्ट हो जायेगा. और लोग तो केवल टाईमपास करने के लिये रहते है तो कुछ भक्त दुसरो की देखा देखी , बराबरी करने के लिये रहते है. मेरे मोहल्ले में इस वर्ष भी महिलाओ के बीच नवरात्री का उपवास रहने के लिये कुछ इसी तरह का माहौल मैने देखा. लोगो में मा दुर्गा के प्रति भक्त कम और शो-बाजी ज्यादा दिखाई पड़ा, कौन रामनवमी के दिन सबसे पहले नौ कन्याओ को भोजन कराकर पुण्य कमाएगा, कौन सबसे बड़ा भक्त बनेगा. और अपने ग्रुप में रौब जमायेगा. यहा बता दू की मै बहुत बड़ा भगवान भक्त नही हू. लेकिन इस तरह की दिखावे ने मुझे व्यथित किया. नवरात्र के दिन मै जब अपने घर समोसे,कचौरियाव जलेबी ले जा रहा था. तभी मौहल्ले की एक महिला ने मुझसे पूछा की मै क्या ले जा रहा हू ? उसने जब समोसा,जलेबी और कचौरिया देखी तो मन मसोस कर और अफसोस भरे लहसे से कहा कि छी मै उपवास हू इसलिये नही खा सकती, यह सूनकर मैने सोचा की कुछ लोगो की भक्ति साधारण भौतिक वस्तुओ से विचलित हो जाती है. हमारे मौहल्ले की अधिकतर सास अपने बहुओ की चुगली , और अधिकांश बहुये अपने सास की बदनामी मे जुटी रहती है. तो इनके नौ दिन उपवास रहकर नौ कन्याओ को भोजन कराना कौन सा पुण्य देगा.
(मेरा औचित्य किसी को ठेस पहुचाने का नही हौ. मैने जो महसूस किया उसे ही कहा है.)
(मेरा औचित्य किसी को ठेस पहुचाने का नही हौ. मैने जो महसूस किया उसे ही कहा है.)
Tuesday, December 1, 2009
A simple, yet very expressive!
MOTHER IS GOD'S Best GIFT.
.
कुछ समय पहले माँ की मर्ज़ी के
बिना इस घर का पत्ता भी नहीं हिलता था, अक्सर
उनकी एक हाँ से कितनी बार हमारे जीवन में खुशियों का अम्बार लगा मगर धीरे
धीरे उनकी शक्तिया और उन शक्तियों का महत्व कम होते होते आज नगण्य हो गया !
अब अम्मा से उनकी जरूरतों के बारे में कोई नहीं पूछता, सब अपने अपने में
व्यस्त है, खुशियों के मौकों और पार्टी आयोजनों से भी अम्मा को खांसी खखार
के कारण दूर ही रखा जाता है !
बाहर डिनर पर न ले जाने का कारण भी हम सबको पता हैं..... कुछ खा तो पायेगी
नहीं अतः होटल में एक और प्लेट का भारी भरकम बिल क्यों दिया जाये, और फिर
घर पर भी तो कोई चाहिए ...
और परिवार के मॉल जाते समय, धीमे धीमे दरवाजा बंद करने आती माँ की आँखों में छलछलाये आंसू कोई नहीं देख पाता !
Subscribe to:
Posts (Atom)