Tuesday, February 14, 2017
पहुँच किनारे भूल गए सब कैसी कश्ती मांझी कौन
Thursday, August 25, 2016
सोचो कितना बवाल होता
समंदर सारे शराब होते तो सोचो कितना बवाल होता,
हक़ीक़त सारे ख़्वाब होते तो सोचो कितना बवाल होता..!!
किसी के दिल में क्या छुपा है ये बस ख़ुदा ही जानता है,
दिल अगर बेनक़ाब होते तो सोचो कितना बवाल होता..!!
थी ख़ामोशी हमारी फितरत में तभी तो बरसो निभ गयी लोगो से,
अगर मुँह में हमारे जवाब होते तो सोचो कितना बवाल होता..!!
हम तो अच्छे थे पर लोगो की नज़र में सदा बुरे ही रहे,
कहीं हम सच में ख़राब होते तो सोचो कितना बवाल होता..
लड़की लड़के से : मत सता लड़की को पाप होगा , तू भी किसी दिन किसी लड़की का बाप होगा।
लड़का लड़की से : भगवान करे तेरा कहा सच्चा हो , जो मुझे बाप कहे वो आपका ही बच्चा हो।
पति (पत्नी से)- मेरा फोन आये तो कहना मैं घर पर नहीं हूं।
अचानक फोन की घंटी बजी..
पत्नी ने फोन उठाकर कहा- वो अभी घर पर हैं।
पत्नी के फोन रखते ही पति खीजते हुए बोला- तुम्हें मैंने मना किया था फिर भी क्यों बताया कि मैं घर पर हूं?
पत्नी- आपने अपने फोन के लिए मना किया था, वह फोन तो मेरे लिए आया था
न हम जाने इश्क मोहब्बत, न हम जाने प्यार,
पेट में जब तक पड़ें न रोटी, सब कुछ है बेकार !
मुद्दतों के इन्तज़ार के बाद बडी हिम्मत से मैने उसे बताया, मुझे 'आप ' पसंद हैं । वो बडी नासमझ निकली, और बोली, मुझे ' भाजपा ' ।
Tuesday, August 4, 2015
जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं
जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं
जो
लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं
चाहने वाले बाज़ार में बिकते नहीं हैं
ख़ुद से पराया ग़ैरों से अपना रहे जो
ऐसे लोग एक दिल में टिकते नहीं हैं
सूरत से जो सीरत को छिपाये फिरते हैं
वो कभी सादा चेहरों में दिखते नहीं हैं
होता है नुमाया दिल को दिल से, दोस्त!
मन के भेद परदों में छिपते नहीं हैं
इन्साँ है वह जो जाने इन्सानियत
हैवान कभी निक़ाबों में छिपते नहीं हैं
वक़्त में दब जाती हैं कही-सुनी बातें
हम कभी कुछ दिल में रखते नहीं हैं
पलटते हैं जो कभी माज़ी के पन्नों को
ये आँसू तेरी याद में रुकते नहीं हैं
नहीं मरना आसाँ तो जीना भी आसाँ नहीं
चाहकर मिटने वाले मिटते नहीं हैं
शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
Wednesday, January 15, 2014
पिताजी आज भी पैसे बचाते हैं
पुरानी पेंट रफू करा कर पहनते जाते है, ब्रांडेड नई शर्ट देने पे आँखे दिखाते हैं..
टूटे चश्मे से ही अख़बार पढने का लुत्फ़ उठाते है, टोपाज केब्लेड से दाढ़ी बनाते हैं, पिताजी आज भी पैसे बचाते है….
टूटे चश्मे से ही अख़बार पढने का लुत्फ़ उठाते है, टोपाज केब्लेड से दाढ़ी बनाते हैं, पिताजी आज भी पैसे बचाते है….
कपड़े का पुराना थैला लिये दूर की मंडी तक जाते हैं, बहुत मोल-भाव करके
फल-सब्जी लाते हैं, आटा नही खरीदते, गेहूँ पिसवाते हैं पिताजी आज भी पैसे
बचाते हैं…
स्टेशन से घर पैदल ही आते हैं, रिक्शा लेने से कतराते हैं, सेहत का हवाला देते जाते हैं, बढती महंगाई पे चिंता जताते हैं,
पिताजी आज भी पैसे बचाते हैं...
पूरी गर्मी पंखे में बिताते हैं, सर्दियां आने पर रजाई में दुबक जाते हैं, एसी/हीटर को सेहत का दुश्मन बताते हैं, लाइट खुली छूटने पे नाराज हो जाते हैं,
पिताजी आज भी पैसे बचाते हैं...
माँ के हाथ के खाने में रमते जाते हैं, बाहर खाने में आनाकानी मचाते हैं, साफ़-सफाई का हवाला देते जाते हैं, मिर्च, मसाले और तेल से घबराते हैं, पिताजी आज भी पैसे बचाते हैं…
गुजरे कल के किस्से सुनाते हैं, कैसे ये सब जोड़ा गर्व से बताते हैं, पुराने दिनों की याद दिलाते हैं, बचत की अहमियत समझाते हैं,
हमारी हर मांग आज भी, फ़ौरन पूरी करते जाते हैं, पिताजी हमारे लिए ही पैसे बचाते है ...
स्टेशन से घर पैदल ही आते हैं, रिक्शा लेने से कतराते हैं, सेहत का हवाला देते जाते हैं, बढती महंगाई पे चिंता जताते हैं,
पिताजी आज भी पैसे बचाते हैं...
पूरी गर्मी पंखे में बिताते हैं, सर्दियां आने पर रजाई में दुबक जाते हैं, एसी/हीटर को सेहत का दुश्मन बताते हैं, लाइट खुली छूटने पे नाराज हो जाते हैं,
पिताजी आज भी पैसे बचाते हैं...
माँ के हाथ के खाने में रमते जाते हैं, बाहर खाने में आनाकानी मचाते हैं, साफ़-सफाई का हवाला देते जाते हैं, मिर्च, मसाले और तेल से घबराते हैं, पिताजी आज भी पैसे बचाते हैं…
गुजरे कल के किस्से सुनाते हैं, कैसे ये सब जोड़ा गर्व से बताते हैं, पुराने दिनों की याद दिलाते हैं, बचत की अहमियत समझाते हैं,
हमारी हर मांग आज भी, फ़ौरन पूरी करते जाते हैं, पिताजी हमारे लिए ही पैसे बचाते है ...
Saturday, November 23, 2013
पति-पत्नी का बिश्वास
पति-पत्नी का बिश्वास एक ऐसा कमजोर पहलू है जो अगर बांधे रखा जाए तो जन्म जन्मांतर तक रहता है,पर यही बिश्वास अगर कमजोर हो तो एक बहुत हलके से चोट से इसे तोडा जा सकता है. अपने प्रेम भरे बिश्वास के गांठ को इतनी मजबूती से बांधो की तूफान भरे झटके को भी यह एक बार नहीं बार-बार सह सके और लोगो को एक उदाहरण प्रस्तुत कर सके .
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ऐसा प्रेम करो जो बिश्वास कर सके , ऐसा बिश्वास रखो जो संबंधो में दरार सह सके !
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सांसो में तुम हो,दिल में भी तुम ,
मन में तुम हीं हो ,जिंदगी के राहों में भी तुम ,
तुम,तुम ,केवल तुम,बस तुम ,
नहीं मिटाना इस बिश्वास को ,
पकडे रहना इस आभास को
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