सच कभी किसी को चोट नहीं पहुचाता हैं और ना ही किसी का दिल दुखाता हैं । सच को स्वीकारने कि ताकत सब में नहीं होती हैं . अगर हम कुछ कहते हैं तो उस पर अटल नहीं रहते हैं यानी हमारे विचार पूर्ण रूप से परिपक्व हो उस से पहले ही हम अपनी राय दे देते हैं और फिर जब कोई हमे आईना दिखता हैं तो हम बजाये अपनी गलती मानने के एक और व्यक्ति तलाशते हैं जिसके साथ मिल कर हम अपनी अपरिपक सोच को सही साबित कर के दूसरे के सच को झूठ साबित कर दे ।
इस संसार मे अगर आप किसी को भी "तुच्छ " कहते हैं तो समझ लीजिये ईश्वर कि बनाई कृति को आप नकार रहे हैं । तुच्छ जैसा तो कोई नहीं हैं ना होगा बस विचार और कर्म सबके अपने हैं ।
आप को यहाँ जितने भी अच्छे और सच्चे लगते हैं उन सब मे कहीं ना कहीं कोई ना कोई कमजोरी हैं और वो कमजोरी उन सब को ही उनसब से जिन मे ये कमजोरी नहीं हैं तुच्छ बनाती हैं ।
Thursday, December 1, 2011
Saturday, October 1, 2011
हमने देखि है उन आंखों की महकती खुशबू
हमने देखि है उन आंखों की महकती खुशबू
हाथ से छु के इससे रिश्तों का इल्जाम न दो
सिर्फ़ एहसास है यह, रूह से महसूस करो
प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो
हमने देखि है उन आंखों की महकती खुशबू
हाथ से छु के इससे रिश्तों का इल्जाम न दो
हमने देखि है उन आंखों की महकती खुशबू
प्यार कोई बोल नहीं, प्यार आवाज़ नहीं
एक खामोशी है, सुनती है कहा करती है
यह बुझती है, न रूकती है, न ठहरी है कहीं
नूर की बूँद है सदियों से बहा करती है
सिर्फ़ एहसास है यह, रूह से महसूस करो
प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो
हमने देखि है
मुस्कराहट से खिली रहती है आंखों में कहीं
और पलकों पे उजाले से रुके रहते हैं
होंठ कुछ कहते नहीं, कांपते होंठों पे मगर
कइतने खामोश से अफसाने रुके रहते हैं
सिर्फ़ एहसास है यह, रूह से महसूस करो
प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो
हमने देखि है उन आंखों की महकती खुशबू
हाथ से छु के इससे रिश्तों का इल्जाम न दो
हमने देखि है…
!!! गुलज़ार फिल्म ख़ामोशी !!!
हाथ से छु के इससे रिश्तों का इल्जाम न दो
सिर्फ़ एहसास है यह, रूह से महसूस करो
प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो
हमने देखि है उन आंखों की महकती खुशबू
हाथ से छु के इससे रिश्तों का इल्जाम न दो
हमने देखि है उन आंखों की महकती खुशबू
प्यार कोई बोल नहीं, प्यार आवाज़ नहीं
एक खामोशी है, सुनती है कहा करती है
यह बुझती है, न रूकती है, न ठहरी है कहीं
नूर की बूँद है सदियों से बहा करती है
सिर्फ़ एहसास है यह, रूह से महसूस करो
प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो
हमने देखि है
मुस्कराहट से खिली रहती है आंखों में कहीं
और पलकों पे उजाले से रुके रहते हैं
होंठ कुछ कहते नहीं, कांपते होंठों पे मगर
कइतने खामोश से अफसाने रुके रहते हैं
सिर्फ़ एहसास है यह, रूह से महसूस करो
प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो
हमने देखि है उन आंखों की महकती खुशबू
हाथ से छु के इससे रिश्तों का इल्जाम न दो
हमने देखि है…
!!! गुलज़ार फिल्म ख़ामोशी !!!
Saturday, May 21, 2011
मेरा कुत्ता भी फेसबुक पर है
काम वाली बाई एक दिन अचानक काम पर नहीं आई तो पत्नी ने फोन पर डांट लगाईं अगर तुझे आज नहीं आना था तो पहले बताना था
वह बोली - मैंने तो परसों ही फेसबुक पर लिख दिया था क़ि एक सप्ताह के लिए गोवा जा रही हूँ पहले अपडेट रहो फिर भी पता न चले तो कहो
पत्नी बोली = तो तू फेसबुक पर भी है
उसने जवाब दिया - मै तो बहुत पहले से फेसबुक पर हूँ साहब मेरे फ्रेंड हैं! बिलकुल नहीं झिझकते हैं मेरे प्रत्येक अपडेट पर बिंदास कमेन्ट लिखते हैं मेरे इस अपडेट पर उन्होंने कमेन्ट लिखा हैप्पी जर्नी, टेक केयर, आई मिस यू, जल्दी आना मुझे नहीं भाएगा पत्नी के हाथ का खाना
इतना सुनते ही मुसीबत बढ़ गयी पत्नी ने फोन बंद किया और मेरी छाती पर चढ़ गयी गब्बर सिंह के अंदाज़ में बोली - तेरा क्या होगा रे कालिया !
मैंने कहा -देवी ! मैंने तेरे साथ फेरे खाए हैं
वह बोली - तो अब मेरे हाथ का खाना भी खा !
अचानक दोबारा फोन करके पत्नी ने काम वाली बाई से घबराये-घबराए पूछा, तेरे पास गोवा जाने के लिए पैसे कहाँ से आये ?
वह बोली- सक्सेना जी के साथ एलटीसी पर आई हूँ पिछले साल वर्माजी के साथ उनकी कामवाली बाई गयी थी तब मै नई-नई थी जब मैंने रोते हुए उन्हें अपनी जलन का कारण बताया तब उन्होंने ही समझाया क़ि वर्माजी की कामवाली बाई के भाग्य से बिलकुल नहीं जलना अगले साल दिसम्बर में मैडम जब मायके जायगी तब तू मेरे साथ चलना !
पहले लोग कैशबुक खोलते थे आजकल फेसबुक खोलते हैं हर कोई फेसबुक में बिजी है कैशबुक खोलने के लिए कमाना पड़ता है
इसलिए फेसबुक ईजी है आदमी कंप्यूटर के सामने बैठकर रात-रातभर जागता है बिंदास बातें करने के लिए पराई औरतों के पीछे भागता है लेकिन इस प्रकरण से मेरी समझ में यह बात आई है क़ि जिसे वह बिंदास मॉडल समझ रहा है वह तो किसी की कामवाली बाई है जिसने कन्फ्यूज़ करने के लिए किसी जवान सुन्दर लड़की की फोटो लगाईं है
सारा का सारा मामला लुक पर है और अब तो मेरा कुत्ता भी फेसबुक पर है
वह बोली - मैंने तो परसों ही फेसबुक पर लिख दिया था क़ि एक सप्ताह के लिए गोवा जा रही हूँ पहले अपडेट रहो फिर भी पता न चले तो कहो
पत्नी बोली = तो तू फेसबुक पर भी है
उसने जवाब दिया - मै तो बहुत पहले से फेसबुक पर हूँ साहब मेरे फ्रेंड हैं! बिलकुल नहीं झिझकते हैं मेरे प्रत्येक अपडेट पर बिंदास कमेन्ट लिखते हैं मेरे इस अपडेट पर उन्होंने कमेन्ट लिखा हैप्पी जर्नी, टेक केयर, आई मिस यू, जल्दी आना मुझे नहीं भाएगा पत्नी के हाथ का खाना
इतना सुनते ही मुसीबत बढ़ गयी पत्नी ने फोन बंद किया और मेरी छाती पर चढ़ गयी गब्बर सिंह के अंदाज़ में बोली - तेरा क्या होगा रे कालिया !
मैंने कहा -देवी ! मैंने तेरे साथ फेरे खाए हैं
वह बोली - तो अब मेरे हाथ का खाना भी खा !
अचानक दोबारा फोन करके पत्नी ने काम वाली बाई से घबराये-घबराए पूछा, तेरे पास गोवा जाने के लिए पैसे कहाँ से आये ?
वह बोली- सक्सेना जी के साथ एलटीसी पर आई हूँ पिछले साल वर्माजी के साथ उनकी कामवाली बाई गयी थी तब मै नई-नई थी जब मैंने रोते हुए उन्हें अपनी जलन का कारण बताया तब उन्होंने ही समझाया क़ि वर्माजी की कामवाली बाई के भाग्य से बिलकुल नहीं जलना अगले साल दिसम्बर में मैडम जब मायके जायगी तब तू मेरे साथ चलना !
पहले लोग कैशबुक खोलते थे आजकल फेसबुक खोलते हैं हर कोई फेसबुक में बिजी है कैशबुक खोलने के लिए कमाना पड़ता है
इसलिए फेसबुक ईजी है आदमी कंप्यूटर के सामने बैठकर रात-रातभर जागता है बिंदास बातें करने के लिए पराई औरतों के पीछे भागता है लेकिन इस प्रकरण से मेरी समझ में यह बात आई है क़ि जिसे वह बिंदास मॉडल समझ रहा है वह तो किसी की कामवाली बाई है जिसने कन्फ्यूज़ करने के लिए किसी जवान सुन्दर लड़की की फोटो लगाईं है
सारा का सारा मामला लुक पर है और अब तो मेरा कुत्ता भी फेसबुक पर है
Wednesday, April 6, 2011
दरबारे वतन में

दरबारे वतन में जब इक दिन सब जाने वाले जायेंगे
कुछ अपनी सजा को पहुंचेंगे, कुछ अपनी जजा ले जायेंगे
ऐ खाकनशीनों उठ बैठो, वो वक़्त करीब आ पहुंचा है
जब तख़्त गिराए जायेंगे, जब ताज उछाले जायेंगे
अब टूट गिरेंगी जंजीरें अब ज़िन्दानों की ख़ैर नहीं
जो दरया झूम के उठे हैं, तिनकों से न टाले जायेंगे
कटते भी चलो, बढ़ते भी चलो, बाजू भी बहुत हैं सर भी बहुत
चलते भी चलो के अब डेरे मंजिल पे ही डाले जायेंगे
ऐ ज़ुल्म के मातों लब खोलो चुप रहने वालों चुप कब तक
कुछ हश्र तो इनसे उट्ठेगा, कुछ दूर तो नाले जायेंगे
Wednesday, March 16, 2011
अब तुम कहो...
जब दिल चाहता कुछ औऱ है पर करना पड़ता कुछ औऱ है...
अब हम नहीं रहे तुम्हारे, पर तुम अब भी हो हमारे,
तुमने कहा हमसे भुला दें तुम्हें लो अब हमने भुला दिया तुम्हें
पर ये तो बता दो हमें हमने तो कुछ कहा नहीं तुमसे
अब तुम कहो क्या हमें भुला दिया तुमने?
तुम कहते हो भूल जाऊं तुम्हें पर तुम चाहते नहीं मैं भूला दूं तुम्हें
तुम कहते दूर हो जाऊं तुझसे पर तुम चाहते नहीं दूर हो जाऊं तुमसे
न जाने ये कैसी कसमकश है
जब दिल चाहता कुछ औऱ है पर करना पड़ता कुछ औऱ है...
अब हम नहीं रहे तुम्हारे, पर तुम अब भी हो हमारे,
तुमने कहा हमसे भुला दें तुम्हें लो अब हमने भुला दिया तुम्हें
पर ये तो बता दो हमें हमने तो कुछ कहा नहीं तुमसे
अब तुम कहो क्या हमें भुला दिया तुमने?
तुम कहते हो भूल जाऊं तुम्हें पर तुम चाहते नहीं मैं भूला दूं तुम्हें
तुम कहते दूर हो जाऊं तुझसे पर तुम चाहते नहीं दूर हो जाऊं तुमसे
न जाने ये कैसी कसमकश है
जब दिल चाहता कुछ औऱ है पर करना पड़ता कुछ औऱ है...
Subscribe to:
Posts (Atom)